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Thursday, October 15, 2026

आईआईएम सिरमौर प्रशासनिक अधिकारी के विरुध्द महिलाओं ने करवाई FIR दर्ज…

Ashoka Times…15 august 2026

धौला कुआं स्थित आईआईएम प्रशासनिक अधिकारी पर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, रिश्वत मांगने, जातिगत भेदभाव एवं आपराधिक षडयंत्र के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के बाद जांच शुरू कर दी गई। इस बारे में रमा देवी पत्नी जोगी राम, आशा देवी पत्नी सलिन्दर पाल निवासी गांव व डा0 धौलाकुआं, जिला सिरमौर ने हुकम चन्द प्रशासनिक अधिकारी आईआईएम सिरमौर के विरुध्द एक शिकायतपत्र पुलिस में दर्ज करवाया है। महिलाओं ने अपनी शिकायत में बताया कि आईआईएम सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारी हुकुमचंद एवं अन्य संबंधित अधिकारी उनसे यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, रिश्वत मांगने, जातिगत भेदभाव एवं आपराधिक षडयंत्र के संबंध के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि हम आईआईएम सिरमौर, धौलाकुआं, हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्सिंग एजेंसी एम/एस सुंदर भूमि के माध्यम से सुरक्षा गार्ड के रुप में कार्यरत थी। हमने अपने सेवाकाल को दौरान पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य किया तथा हमारे विरुध्द कभी कोई शिकायत या अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं हुई। जब हम एम/एस सुंदर भूमि एजेंसी के माध्यम से आईआईएम सिरमौर में कार्यरत थी, उसी दौरान प्रशासनिक अधिकारी हुकम चंद द्वारा हमारे साथ लगातार अशोभनीय व्यवहार, अभद्र टिप्पणियां, मानसिक प्रताड़ना तथा यौन उत्पीड़न की घटनाएं की जाती थी। वह अपने पद का अनुचित लाभ उठाकर हमे असहज एवं भयभीत करने का प्रयास करता था।

उन्होंने कहा नौकरी छिन जाने तथा प्रतिशोधात्मक कार्रवाही के भय से हम उस समय किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत नहीं कर सकीं और मजबूरीवश चुप रही। सुरक्षा एजेंसी के परिवर्तन के पश्चात दिनांक 01.01.2026 से हमारी सेवाएं अचानक समाप्त कर दी गई। इसके पश्चात हमने आईआईएम सिरमौर के निदेशक प्रफुल्ला बाई. अग्निहोत्री से भी अपनी समस्या के संबंध में निवेदन किया, परंतु हमारे अनुरोध पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। बाद में हमने आईआईएम सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारी हुकम चंद से मुख्य सुरक्षा द्वार पर मिलकर पुनः रोजगार दिए जाने हेतु अनुरोध किया। हमने उन्हे अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया तथा यह भी बताया कि शिकायतकर्ता रमा देवी अनुसुचित जाति (एससी) वर्ग से संबंधित है। इस दौरान हुकम चंद ने हमारी मजबूरी का अनुचित लाभ उठाते हुए हम दोनों से नौकरी जारी रखने अथवा पुनः नियुक्ति दिलाने के बदले प्रत्येक से * 25,000/- (पच्चीस हजार रुपये) की मांग की। इतना ही नहीं, उसने हमसे कहा कि यदि हमे नौकरी चाहिए तो हमे उसकी इच्छा अनुसार कार्य करना होगा तथा उसके द्वारा किए जाने वाले किसी अनुचित व्यवहार का विरोध नहीं करना चाहिए। हुकम चंद ने हमारे चरित्र के संबंध में भी अपमानजनक एवं अश्लील टिप्पणियां की, जिससे हमारी गरिमा एवं सम्मान को गंभीर ठेस पहुंची।

उसके व्यवहार एवं कथनों से हमे स्पष्ट रुप से यह महसूस हुआ कि वह हमारी मजबूरी का लाभ उठाकर हमारा यौन शोषण (सेक्सुअल हैरेसमेंट) तथा मानसिक शोषण (मेंटल हैरेसमेंट) करना चाहता है। इसके अतिरिक्त, जब शिकायतकर्ता रमा देवी ने अपने अनुसुचित जाति वर्ग से संबंधित होने की बात कही, तब हुकम चंद ने जातिसुचक एवं अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए कहा कि वह इस बात को नहीं मानता तथा इस आधार पर भी हमारे साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया। इससे हमे सामाजिक अपमान एवं मानसिक पीड़ा का सामने करना पड़ा। हुकम चंद के उक्त कृत्य महिलाओं की गरिमा, सम्मान एवं संवैधानिक अधिकारों के विरुध्द है।

उसके द्वारा किया गया आचरण प्रथम दृष्या यौन उत्पीडन, मानसिक प्रताडना, भ्रष्टाचार, पद के दरुपयोग, महिलाओं के शोषण, अनुसुचित जाति के प्रति भेदभाव तथा आपराधिक षडयंत्र की श्रेणी में आता है। उसके कार्यों के कारण हमें गंभीर मानसिक आघात, सामाजिक अपमान एवं आर्थिक क्षति का सामना करना पडा है। शिकायतकर्ता महिलाओं ने कहा कि उपरोक्त तथ्यों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर हुकम चंद तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुध्द भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), महिलाओं के यौन उत्पीडन से संबंधित लागू प्रावधानों, भ्रष्टाचार एवं धमकी से संबंधित प्रावधानों तथा अनुसुचित जाति एवं अनुसुचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की लागू, धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए,

एसपी सिरमौर निश्चिंत सिंह नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में गंभीरता से जांच की जा रही है।

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