6.5 C
New York
Sunday, October 18, 2026

दुग्ध समर्थन मूल्य से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति हुई सुदृढ़…

Ashoka time’s…2 Feburary 26

प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि से सिरमौर जिला के उप-मंडल सराहां में पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।

किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करते हुए दूध के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय में बढ़ोतरी के सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे है।
प्रदेश सरकार द्वारा गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इस निर्णय से दुग्ध उत्पादन से जुड़े पशुपालकों को उनके परिश्रम का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। जिला सिरमौर में मिल्क फेड द्वारा संचालित दुग्ध केंद्र के अंतर्गत 37 सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनसे जुड़े 1562 दुग्ध उत्पादक नियमित रूप से अपना दूध मिल्क फेड दुग्ध केंद्र को उपलब्ध करवा रहे हैं। सरकार द्वारा दूध के समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी का सीधा लाभ इन सभी पशुपालकों को प्राप्त हो रहा है।
श्याम दत्त गौतम का कहना है कि वो गाँव पशोग, तहसील पच्छाद के रहने वाले एक दुग्ध उत्पादक किसान है। जिनके पास इस समय तीन जर्सी गायें हैं और वो प्रतिदिन लगभग 12 लीटर दूध दुग्ध सहकारी सभा को देते है। पिछले 2-3 वर्षों में दूध के दामों में काफी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। दूध का रेट लगभग 20 से 25 रुपये प्रति लीटर बढ़ा है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ है। इस बढ़े हुए रेट का फायदा न केवल उन्हें , बल्कि आम किसान और पशुपालकों को भी मिला है। पहले जो पशुपालक किसान दूध उत्पादन से पीछे हट रहे थे, अब उनमें दोबारा रुचि बढ़ी है। इसके कारण आस-पास के क्षेत्रों के पशुपालक अब अपने घरों में ज्यादा से ज्यादा गायें पाल रहे हैं और दूध नियमित रूप से दुग्ध सहकारी सभा को दे रहे हैं।
भूपेंद्र ठाकुर का कहना है कि वो धिनी पंचायत, बनाह की सेर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से एक दुग्ध उत्पादक के रूप में जुड़े हुए हैं और उनका कहना है सरकार द्वारा दुग्ध के क्रय मूल्य में की गई वृद्धि से हम जैसे आम किसान और पशुपालक बहुत खुश हैं। इस निर्णय का सीधा लाभ समाज के हर दुग्ध उत्पादक को मिल रहा है। यह फैसला वास्तव में किसानों के हित में लिया गया एक सराहनीय कदम है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें दूध बेचने के लिए छोटे-छोटे बाजारों में भटकना पड़ता था, जिससे समय, मेहनत और खर्च तीनों बढ़ जाते थे तथा कई बार उचित दाम भी नहीं मिल पाता था। लेकिन अब यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, क्योंकि वह अपना दूध एक ही स्थान पर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति में जमा करते हैं।
इसी प्रकार एक अन्य दुग्ध उत्पादक धर्म सिंह पुंडीर का कहना है कि, वह गाँव चनेना, डाकघर भेलन, तहसील पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी है, अपने गाँव में संचालित एक महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति (मिल्क सोसायटी) से जुड़े हैं। उनका कहना है कि पिछले लगभग एक वर्ष से दूध के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। यह वृद्धि माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी द्वारा लिया गया एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक निर्णय है। दूध के दाम बढ़ने से आज दूध व्यवसाय से जुडे़ हर घर तक अच्छी आमदनी पहुँच रही है, जिससे किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। वर्तमान में जो दूध के दाम मिल रहे हैं, वे वास्तव में बहुत अच्छे हैं। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्र को मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि पहले उनके क्षेत्र में दूध उत्पादन की स्थिति बहुत कमजोर हो गई थी। जहाँ पहले लोग लगभग 12 से 15 लीटर दूध प्रतिदिन सहकारी सभा को दिया करते थे, धीरे-धीरे यह मात्रा घटकर केवल 10 से 13 लीटर रह गई थी। लेकिन जैसे ही दूध के दाम बढ़ाए गए, उसका सकारात्मक असर तुरंत देखने को मिला। दाम बढ़ने के बाद दुग्ध उत्पादकों का उत्साह बढ़ा और आज उनकी सोसायटी से प्रतिदिन लगभग 400 से 500 लीटर दूध सहकारी सभा को दिया जा रहा है। यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकार के इस निर्णय ने दुग्ध उत्पादन को फिर से बढ़ावा मिला है।
एक अन्य दुग्ध उत्पादक प्रवीन ठाकुर का कहना है कि वह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति डिंगरी मणिघाट में पिछले लगभग 20 वर्षों से सचिव, पद पर कार्यरत है। पिछले दो वर्षों से दूध के रेट में जो बढ़ोतरी हुई है, उससे पशुपालकों को बहुत अधिक लाभ पहुँचा है। वर्तमान में गाय के दूध का रेट 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का रेट 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। जिनका दूध उच्च गुणवत्ता का है, उन्हें उनकी सोसायटी द्वारा 52 तथा 62 रुपये प्रति लीटर तक का अच्छा मूल्य भी दिया जा रहा है। दूध के दाम बढ़ने के बाद पशुपालकों का उत्साह बढ़ा है और इसके परिणामस्वरूप दूध की आपूर्ति में भी बढ़ोतरी हुई है। यह निर्णय पशुपालकों के हित में लिया गया एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। यह पहल प्रदेश सरकार की किसान एवं पशुपालक हितैषी नीतियों का सशक्त उदाहरण है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles