Home / Himachal Pradesh / पांवटा साहिब में धूमधाम से मनाया जा रहा गुरु नानक देव जी का प्रकट दिवस…मनमोहक और शालीन दिखा पंज प्यारेयां दा स्वरूप….

पांवटा साहिब में धूमधाम से मनाया जा रहा गुरु नानक देव जी का प्रकट दिवस…मनमोहक और शालीन दिखा पंज प्यारेयां दा स्वरूप….

पांवटा साहिब में धूमधाम से मनाया जा रहा गुरु नानक देव जी का प्रकट दिवस…मनमोहक और शालीन दिखा पंज प्यारेयां दा स्वरूप….

पूरा जीवन मानव हित में रहा समर्पित… पढ़िए क्या बोले गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब के अध्यक्ष….

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पांवटा साहिब में गुरु नानक देव जी की प्रकट दिवस पर धूमधाम से नगर कीर्तन का आयोजन किया गया इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे वही पंज प्यारेयां दे स्वरूप बिच खालसा बेहद मनमोहक और शालीन देख रहे थे।

 

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प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि को सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव की जयंती मनाई जाती है। इस साल 8 नवंबर को गुरु नानक देव की जयंती मनाई जा रही है।

गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब में वैसे तो पिछले कई दिनों से लगातार हजारों की तादाद में संगत पहुंच रही है लेकिन नगर कीर्तन के दौरान सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे इस दौरान गुरुद्वारा पांवटा साहिब में सुबह प्रभात फेरी का भी आयोजन किया गया इसके अलावा पूरा दिन दरबार साहिब में कीर्तन का आयोजन भी रखा गया।

गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को पाकिस्तान में स्थित श्री ननकाना साहिब में हुआ था। गुरु नानक देव की जयंती को गुरु पर्व और प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। गुरु पर्व पर सभी गुरुद्वारों में भजन, कीर्तन होता है और प्रभात फेरियां भी निकाली जाती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन थे गुरुनानक देव और कैसे मनाई जाती है इनकी जयंती…

गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब के अध्यक्ष हरभजन सिंह और प्रबंधक जगीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पांवटा साहिब में धूमधाम से गुरु नानक देव प्रगट दिवस मनाया जा रहा है उन्होंने बताया कि गुरुनानक जी की जन्म तिथि और स्थान सिखों के पहले गुरु नानक जी का जन्म 1469 में पंजाव प्रांत के तलवंडी में हुआ था। ये स्थान अब पाकिस्तान में है। इस स्थान को नानकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। सिख धर्म के लोगों के लिए ये बहुत ही पवित्र स्थल है। गुरु नानक जी की माता का नाम तृप्ता और पिता का नाम कल्याणचंद था।

नानक जी बचपन से ही अपना ज्यादातर समय चिंतन में बिताते थे। वे सांसारिक बातों का मोह नहीं रखते थे। नानक देव जी एक संत, गुरु और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव हित में समर्पित कर दिया था।

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