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सीमाओं पर चयनित कर्मचारी ही क्यों होते हैं तैनात…

सीमाओं पर चयनित कर्मचारी ही क्यों होते हैं तैनात…

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश…पढ़िए पर्दे के पीछे का सच…

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Ashoka Times….

कांग्रेस के विधायक केवल सिंह पठानिया ने अपने ही मुख्यमंत्री से सवाल पूछा कि सीमाओं पर पुलिस और वन और माइनिंग के चयनित कर्मियों को ही बार-बार क्यों अपना तैनात किया जाता हैं जिसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी सभी सीमाओं और नाकों की जांच की जाएगी जिन पर बार-बार विशेष पुलिसकर्मी और वन कर्मी तैनात रहे हैं।

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एक जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश की सीमाओं में सबसे अधिक संवेदनशील सीमाएं इंडस्ट्री एरिया की मानी जाती है जिसमें पांवटा साहिब और बीबीएन शामिल है।
कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने सवाल किया कि कुछ चयनित कर्मचारी ही बार-बार हिमाचल सीमाओं की पोस्टिंग पर आ रहे हैं इनके बार-बार तैनाती आखिर क्यों की जा रही है इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच की जाएगी आखिर कुछ चयनित कर्मचारी ही बॉर्डर पर पोस्ट क्यों किए जा रहे हैं।

क्या है कारण…

दरअसल हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर तैनात हो रहे पुलिस और वन माइनिंग विभाग कर्मचारियों के कारण तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है जिसमें नशीले कारोबार सहित क्रैशर से निकलने वाले हजारों बड़े वाहनों से उगाही, बड़ी बड़ी इंडस्ट्रीज से रो मटेरियल की तस्करी, इसके अलावा इंडस्ट्री और शहरों से निकलने वाला भारी मात्रा में कबाड़ जिसमें 25% से अधिक चोरी का सामान भी दूसरे राज्यों में तस्कर किया जाता है। इन सब को बढ़ावा मिल रहा है।

अतिरिक्त खर्चों का दबाव ….

सीमा पर तैनात वन विभाग पुलिस कर्मी या माइनिंग चौकियों पर तैनात कर्मियों पर अधिक राजस्व के अलावा अतिरिक्त खर्चे का दबाव भी रहता है जिसमें मंत्रियों और पुलिस के बड़े अधिकारियों सहित हिमाचल एडमिनिस्ट्रेटिव लोगों के अतिरिक्त खर्चों का दबाव रहता है जिसके कारण हजारों करोड रुपए की तस्करी इन सीमाओं से होती रहती है।

थानों में पोस्टिंग पर सवाल ….

दरअसल सीमाओं पर ही नहीं हिमाचल प्रदेश के थानों, अधिशासी अभियंताओं और अन्य एडमिनिस्ट्रेटिव विभागों में भी कुछ अधिकारी बार-बार अपनी पोस्टिंग करवाते हैं हिमाचल प्रदेश में मलाईदार जगहों पर जाने के लिए अधिकारी मंत्रियों और उनके सचिवों को खुश करने के लिए बड़े तोहफे भेंट करते हैं जिसमें संभवत सोने चांदी के अलावा गैस में शामिल रहता है।

चक्र….

दरअसल यह है कैसा चक्र है जिसे सरकार तोड़ पाने में हमेशा नाकामयाब रही है क्योंकि सरकारों के भीतर बैठे मंत्री सचिव सभी गोरखधंधो में कहीं ना कहीं अपनी भूमिका अदा कर जाते हैं।

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