राजेन्द्र धीमान ने दमेनू पर दी देव धुनों व रण बाजा जैसे प्रस्तुतियां
Ashoka time’s…26 october 25 ( shobha)
संगड़ाह। राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह मे संगीत विभाग (स्वर) तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में सिरमौर वाद्य यंत्रों व लोक धुनों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों की जानकारी देना, उनके स्वर-विन्यास, ताल-प्रयोग तथा संरक्षण के उपायों से परिचित कराना था। कार्यशाला का शुभारंभ संगीत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विनोद व आइक्यूएसी समन्वयक प्रो. संदीप ने किया। कार्यक्रम में मूल स्रोत व्यक्ति के रूप में स्थानीय पारम्परिक लोक वादक अथवा बजतंरी राजेन्द्र धिमान उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान से अवगत कराया। कार्यशाला में संगीत के 11 छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान राजेन्द्र धीमान ने सिरमौर जिला के पारंपरिक वाद्य यंत्र दमेनू, ढोल व नगाड़ा पर गिरिपार के मंदिरों में बजने वाली नौबत देवधुन, माता भेंट ताल, दीपचंदी, देव भंडार, संधुआ ताल, बिशु रण बाजा, शब्द ताल, विवाह ताल, रासा व नाटी आदि पारम्परिक तालों का अभ्यास कराया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल इन वाद्य यंत्रों की ध्वनि संरचना और ताल प्रणाली के साथ साथ इनके निर्माण, उपयोग व रखरखाव के तरीके भी विस्तार से बताए।

