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नकली दवाओं की तस्करी के लिए सॉफ्ट स्टेट के तौर पर उभर रहा हिमाचल प्रदेश…?

नकली दवाओं की तस्करी के लिए सॉफ्ट स्टेट के तौर पर उभर रहा हिमाचल प्रदेश…?

Ashoka Times…5 December

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हिमाचल प्रदेश नकली दवाओं और ड्र्ग्स की तस्करी के लिए सॉफ्ट स्टेट के तौर पर उभर कर आ रहा है बद्दी में नकली दवाओं की कंपनी लगातार दवाएं बनाती रही और प्रदेश ड्रग कंट्रोलर प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

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हिमाचल प्रदेश में लगातार नकली दवाएं बनाने वाली कंपनियां सामने आ रही है हाल ही में बद्दी की एक कंपनी में नकली दवाओं का कारोबार चल रहा था बता दें कि यहां पर करोड़ों रुपए की नकली दवाएं सामने आई। यहां से नकली दवाएं बनाकर उत्तर प्रदेश भेजी जा रही थी। बीते कल 27 लाख 91 हजार से अधिक की बनी नकली दवाएं ड्रग कंट्रोलर विभाग द्वारा वापिस बद्दी लाई गई है। यह दवाएं बद्दी में फर्जी कंपनी में बनाई जा रही थी जिसे प्रदेश की विद्युत बोर्ड द्वारा कनेक्शन दिया गया था इसके अलावा यहां लगातार दबाए बन रही थी और ड्रग कंट्रोलर मुख्यालय बद्दी को इसकी भनक तक नहीं थी अब जब इस मामले का खुलासा हुआ है तो प्रदेश का ड्रग कंट्रोलर विभाग हरकत में आया है और यूपी पुलिस के साथ मिलकर इन आरोपियों के गोदाम पर छापेमारी कर रहा है।

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सिर्फ इतना ही नहीं पांवटा साहिब में कुछ वर्ष पहले एक बड़ी कंपनी नशीली दवाओं का कारोबार कर रही थी वहां पर भी जब शिकायत के बाद प्रदेश के दवा नियंत्रक विभाग द्वारा छापेमारी की गई तो लाखों रुपए की नकली दवाएं सामने आई लेकिन आज भी उस कंपनी को चलाने वाले मुख्य आरोपी खुलेआम दूसरी कंपनी में पार्टनरशिप कर घूम रहे हैं जबकि एक सुपरवाइजर को उस पूरे मामले में मुख्य आरोपी बनाकर प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर विभाग और पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ लिया। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश नकली दवाओं के माफियाओं के लिए सॉफ्ट स्टेट बनकर उभरा है

सवाल यह उठता है कि बद्दी में इतने बड़े पैमाने पर नकली दवाएं बनाई जा रही थी और विभाग को भनक तक नहीं थी सिर्फ इतना ही नहीं यहां से लगातार दवाएं आगरा और दूसरी जगहों पर भेजी जा रही थी इतने बड़े पैमाने पर दवाएं दूसरे राज्य में भेजी जा रही थी आखिर इसकी खबर किसी भी विभाग को क्यों नहीं मिली जबकि एक कंपनी को चलाने के लिए पॉल्यूशन विभाग सहित एक दर्जन के करीब एनओसी की जरूरत पड़ती है और एनओसी के लिए अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पूरी छानबीन कर एनओसी देने होती है इसका मतलब यह है कि हिमाचल प्रदेश में इस तरह की कंपनियों को रन करना बेहद आसान है क्योंकि अधिकारी अपने एसी दफ्तरों से निकल कर कभी विशेष अभियान चलाते ही नहीं हैं।

दरअसल हिमाचल प्रदेश में सबसे बड़े राजस्व में का हिस्सा फार्मा इंडस्ट्री से शुरू होता है फार्मा इंडस्ट्री सिर्फ सरकारों को चलाने के लिए पैसा मुहैया नहीं कराती है बल्कि सरकार बनाने के लिए भी एक बड़ी लोबी प्रदेश में काम करती है

वही इस पूरे मामले में हिमाचल प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर अधिकारी नवनीत मरवाहा ने कहा कि 27 लाख रुपए से अधिक की दवाई जोकि बद्दी में बनाई गई थी सभी को सबूत के तौर पर वापस ला रहे हैं ताकि गुनाहगारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की नकली दवा कंपनियों को पूर्णतया रोकने के लिए विभाग विशेष कदम उठाएगा।

 

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