अधिवक्ता रमा ने आसान भाषा में दी संबंधित कानून की जानकारी
Ashoka time’s…13 November 25
संगड़ाह। राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह में गुरुवार को लैंगिक उत्पीडन पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
इस दौरान अधिवक्ता रमा चौहान ने बताया कि, यौन एवं लैंगिक उत्पीड़न केवल शारीरिक छेड़छाड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि अनचाही टिप्पणियाँ, अश्लील संदेश, बार-बार परेशान करना, अवांछित दृष्टि (घूरना), काम या क्लास के दौरान किसी के साथ अनुचित व्यवहार, सोशल मीडिया पर धमकाना या ब्लैकमेल करना तथा किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले अन्य व्यवहार भी उसी श्रेणी में आते हैं। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को कानूनी प्रक्रियाओं से रू-ब-रू कराते हुए पोश एक्ट, 2013 के प्रमुख प्रावधानों, आंतरिक शिकायत समिति की संरचना और अधिकारों के बारे में विस्तार से समझाया। रमा ने बताया कि, किसी भी शिकायत की सुनवाई संस्थान के आईसीसी द्वारा समयबद्ध तरीके से (कानून के अनुरूप) की जानी चाहिए। रमा ने छात्रों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी छात्रा या छात्र को असुरक्षा का अहसास हो तो तुरंत मामले को आईसीसी या महिला प्रकोष्ठ के पास रखें। यदि संस्थागत स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वे पुलिस, राज्य महिला आयोग अथवा विधिक सहायता तंत्र का सहारा ले सकती हैं। प्राचार्या डॉ. मीनू भास्कर ने अपने संबोधन में कहा कि महाविद्यालय प्रशासन किसी भी प्रकार की शिकायत को पूरी गंभीरता से लेगा और पीड़ित विद्यार्थियों को सम्पूर्ण गोपनीयता तथा सुरक्षा के साथ सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय ने आईसीसी को सशक्त करने, शिकायत निवारण प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और पीड़ितों के लिए परामर्श व मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए हैं और आगे भी कदम उठाते रहेंगे।

