IGMC में आपरेशन दौरान सिरमौर के युवक के फेफड़े से निकाला 1 इंच लंबा पेच…
Ashoka time’s…8 May 26
सिरमौर जिले के कुलधिना का 27 वर्षीय युवक पिछले तीन साल से लगातार खांसी से परेशान था। उसने कई निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन बीमारी की असली वजह किसी की समझ में नहीं आ रही थी।
एक्सरे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें भी हुईं, लेकिन रिपोर्टों में ऐसा कुछ सामने नहीं आया, जिससे उसकी परेशानी का कारण साफ हो सके। लगातार खांसी और इलाज के बाद भी राहत न मिलने से युवक परेशान और थका हुआ महसूस करने लगा था।
आखिरकार युवक शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पल्मोनरी विभाग पहुंचा। यहां सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरभि जग्गी ने उसकी पुरानी रिपोर्टें देखीं और ब्रोंकोस्कोपी करवाने की सलाह दी। जांच शुरू हुई तो डॉक्टरों के सामने चौंकाने वाला सच आया। युवक के दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से यानी ब्रॉन्कस में करीब एक इंच लंबा और मोटा पेच फंसा हुआ था। डॉक्टरों के मुताबिक यह पेच काफी समय से फेफड़े में मौजूद था और लगातार खांसी की वजह बन रहा था।
डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए ब्रोंकोस्कोपी के जरिए पेच को निकालने की प्रक्रिया शुरू की। फॉरसेप्स की मदद से पेच को सावधानी से बाहर निकाला गया। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया सिर्फ सात मिनट में पूरी हो गई और पहली ही कोशिश में सफलता मिल गई। डॉक्टरों का कहना है कि युवक को खुद भी यह नहीं पता था कि उसने यह पेच कब निगल लिया था। लंबे समय तक फेफड़े में फंसे रहने के बावजूद यह मामला सामान्य जांचों में पकड़ में नहीं आया।पेच निकलने के बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार आया है और अब वह पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में पल्मोनरी विभाग के एचओडी डॉ. मलय सरकार, डॉ. आरएस नेगी, डॉ. सुनील शर्मा और डॉ. डिंपल का भी सहयोग रहा। वहीं सीनियर रेजिडेंट डॉ. राघव निरूला, जूनियर रेजिडेंट डॉ. मयूर बग्गा और तकनीशियन प्रिया व लीला भी मौजूद रहे। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी के पीछे असामान्य कारण छिपे हो सकते हैं और ऐसे मामलों में गहराई से जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।

