2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल…
Ashoka Times…1 September 2026
पांवटा साहिब में 2027 विधानसभा चुनाव इस बार राजनीतिक गलियारों में नई गणनाएं करने को तैयार। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पांवटा भाजपा मंडल अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से दिल्ली स्थित उनके आवास पर भेंट की है।
जिसको लेकर काफी चर्चाएं भी हो रही है।विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा पार्टी में प्रत्याशियों की टिकट बंटवारे को लेकर टॉप 10 लीडर में से एक मानें जाते है। बताया जाता है कि इस बार भाजपा में विधानसभा प्रत्याशी टिकट को लेकर घमासान हो सकता है।
क्या बोले मदन मोहन शर्मा…
मदन मोहन शर्मा ने बताया कि उन्होंने श्री नड्डा से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने ईश्वर से नड्डा के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना भी की।
हालांकि, इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी से जुड़े विभिन्न नेताओं की मेल-मुलाकातों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
पांवटा साहिब के विधायक चौधरी सुखराम के स्वास्थ्य को लेकर सवाल…
हालांकि स्वयं सुखराम चौधरी कहते हैं कि वह बिल्कुल स्वस्थ है लेकिन सूत्रों की माने तो डॉक्टर ने उन्हें आराम करने और ज्यादा लोगों से न मिलने की सलाह दी है। जिसको देखते हुए विधायक चौधरी सुखराम ने अपनी बेटी को भी राजनीतिक मैदान में उतारा है हालांकि अभी तक उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या उनकी बेटी उनकी राजनीतिक गद्दी को संभालेगी।
दूसरी और भाजपा संगठन और आरएसएस के बदले हुए तेवर…
वही आपको बता दे की जिला सिरमौर में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी संगठन और आरएसएस के तेवर पहले से काफी बदले हुए हैं संभव है कि इस बार चुनावी प्रत्याशियों की टिकट को लेकर बड़े फेरबदल के लिए प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर नए सुझाव दिए जा सकते हैं।
पांवटा विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा के भविष्य के संगठनात्मक समीकरणों और संभावित जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में किसी नई जिम्मेदारी या राजनीतिक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
राजनीति में नेताओं की मुलाकातें अक्सर संगठनात्मक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर होती हैं, लेकिन चुनावी माहौल की आहट के बीच ऐसी बैठकों को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। पांवटा की राजनीति में आगे क्या नए समीकरण बनते हैं, यह आने वाला समय ही स्पष्ट करेगा।

