अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स माफिया का अड्डा बना पांवटा, वर्षों से एक जगह जमें अधिकारी बेखबर..पढ़ें पूरा मामला…
Ashoka Times…7 November 2025
पांवटा साहिब की एक फार्मा कंपनी द्वारा तैयार कोडिंन युक्त एस्कफ सिरप की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली एनसीआर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोडिंन युक्त कफ सिरप की तस्करी की जा रही थी।
पांवटा साहिब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स माफिया का अड्डा बनकर उभर रहा है। वहीं ड्रग्स अधिकारी या तो इन सब से बेखबर है या उनकी मिली भगत से यहां से देश भर में कफ सिरप और नशीली दवाएं तस्करी की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पांवटा साहिब स्थित एस्कफ सिरप की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट से बड़े पैमाने पर कफ सिरप की तस्करी का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस तस्करी में संलिप्त गिरोह का सरगना सौरभ त्यागी जिसने दिल्ली एनसीआर में RS फर्म इंद्रापुरम के नाम से लाइसेंस बना रखा था। लगातार भारी तादाद में कोडिंन युक्त कफ सिरप पांवटा साहिब से खरीद रहा था और गाजियाबाद में अपने एक बड़े गोदाम में कफ सिरप रखा जाता था।
यहां से इसकी आपूर्ति बांग्लादेश सहित उन राज्यों में की जाती थी जहां शराब पर प्रतिबंध है। सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में केमिस्ट, फार्मासिस्ट, मेडिकल स्टोर संचालक और ट्रांसपोर्टर की जुगलबंदी से अंतरराज्यीय स्तर पर तस्करी की जा रही थी। गिरोह ने नौ फर्जी कंपनियां बनाकर फर्जी बिलों से सिरप की ढुलाई को वैध दर्शाने का प्रयास किया था।
कंटेनर और ट्रकों में सिरप के डिब्बों को चूने के कट्टू, गेहूं आदि की बोरियों में छुपाया जाता था ताकि चैकिंग में भ्रम पैदा हो सके। जांच में अब तक कई राज्यों से जुड़े आरोपियों की पहचान की गई है। कफ सिरप की आपूर्ति के एवज में करोड़ों रुपये हवाला के जरिए लेनदेन किए जाते थे। पुलिस ने फर्जी फर्मों और उनके संचालकों की तलाश तेज कर दी।
ड्रग्स अधिकारी संदिग्धता के दायरे में…
बता दें की कोडिंन युक्त कफ सिरप बेहद संवेदनशील माना जाता है। उक्त कफ सिरप में अफीम (कोडिंन)की कुछ मात्रा डाली जाती है जिससे खांसी दब जाती है लेकिन इस दवा को युवा नशे के लिए भी इस्तेमाल करते है। सिरमौर के ड्रग्स अधिकारियों का दायित्व बनता है कि जिन फार्मा कंपनियों में कोडिंन युक्त दवाई बनाई जा रही है उन पर सख्त निगरानी रखी जाए, उनकी खपत की जानकारी अन्य राज्यों के अधिकारियों से साझा की जाए लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया जाता किसी लालच के चलते पूरी तरह से कोडिंन युक्त कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों को छूट दे दी जाती है।
200 रूपए की सीसी बिकती है 800 से ₹1000 की…
जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब और बद्दी से तस्करी की जा कोडिन युक्त कफ सिरप ₹200 मूल्य की बिकती है लेकिन नशा बाजार में इसकी कीमत₹800 से 1000 तक पहुंच जाती है।
बता दें की कुछ महीने पहले ही पौंटा साहिब के सूरजपुर से 35 लाख नशीली दवाओं की गोलियां बरामद की गई थी जिसकी तस्करी पंजाब हरियाणा उत्तराखंड हिमाचल और अन्य कई राज्यों में भी की जा रही थी। पंजाब की नारकोटिक्स टीम द्वारा इस बड़ी खेत को पकड़ा गया था। जिसका खुलासा अशोका टाइम्स द्वारा किया गया था।
सालों से एक ही जगह जमें अधिकारी संदेह के दायरे में…
बता दें की जिला सिरमौर में कई वर्षों से जिला अधिकारी एक ही जगह जमें हुए हैं। और उनके द्वारा पूरा विभाग चलाया जा रहा है । ऐसे में लगातार विभाग की नाक तले पांवटा साहिब में अंतरराष्ट्रीय दवा तस्करी के मामलों पर खुलासे हो रहे हैं व ड्रग्स माफिया का अड्डा बनता जा रहा है। जिला सिरमौर और पांवटा साहिब के अधिकारियों की नाक तले न केवल कोडिंन युक्त कफ सिरप बन रहा है बल्कि नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं का भंडारण और तस्करी के मामले भी सामने आ रहे हैं। वहीं सिरमौर के अधिकारी या तो इन सबसे बेखबर है या उनकी मिली भगत से देश भर में यह गोरखधंधा फैलाया जा रहा है।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर निशांत सरीन को ईडी ने गिरफ्तार किया था। निशांत सरीन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ है। सरीन ने सहायक औषधि नियंत्रक बद्दी के रूप में तैनात रहते हुए व्यक्तिगत लाभ और भ्रष्टाचार और रिश्वत के लिए आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया था। ईडी की तलाशी कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दवा लाइसेंस, फार्मास्युटिकल कंपनियों को जारी किए गए थे, क्लीयरेंस, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, पैन ड्राइव भी जब्त किए गए। सरकार को चाहिए कि जिला सिरमौर सहित किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में अधिकारियों को समय-समय पर बदला जाए ताकि मिली भगत की संभावनाएं कम की जा सके।

