Ashoka Times…14 September 2026
हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में निरीक्षण के लिए गए एसडीएम व नैना देवी मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी धर्मपाल चौधरी को मंदिर परिसर में जातिवाद-छुआछूत का दंश झेलना पड़ा है जबकि वह एक उपमंडल मजिस्ट्रेट हैं।
हिमाचल प्रदेश में किस तरह से जातिवाद और छुआछूत का जहर घुला हुआ है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। छोटे-छोटे आम दलित लोगों को यह दंश हर रोज झेलना पड़ता है लेकिन सुर्खियां तब बनती हैं जब एसडीएम जैसे बड़े पद पर तैनात अधिकारी के साथ भी मंदिर परिसर में जातिवाद और छुआछूत जैसे कर्मकांड हो जाते हैं।
मामला नैना देवी मंदिर से जुड़ा है जहां पर एसडीम नैना देवी मंदिर के अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जब वह मंदिर परिसर में अचानक निरीक्षण पर पहुंचे तो कुछ ब्राह्मण लोग रसोई में माता को लगाए जाने वाला भोग बना रहे थे उनमें से एक अभिषेक शर्मा जिसकी मौके पर ड्यूटी भी नहीं थी, एसडीम धर्मपाल को रसोई में देखकर आक्रोशित हो गए। उन्होंने एसडीएम पर धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए, जातिवाचक शब्दों का इस्तेमाल किया और खुद ही पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने पहुंच गए। जिसके बाद इस विवाद की शुरुवात हुई। बता दें कि एसडीएम धर्मपाल ही वर्तमान में नैना देवी मंदिर न्यास के अध्यक्ष हैं।
वहीं दूसरी और इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब नैना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने एसडीएम धर्मपाल चौधरी का समर्थन करते हुए आरोपी पुजारी अभिषेक शर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मुख्य पुजारी ने SDM का समर्थन करते हुए शिकायतकर्ता पर जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोपों की जांच और कार्रवाई करने का आह्वान किया है।
विवाद बढ़ने के बाद अब मंदिर के मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा खुलकर प्रशासनिक अधिकारी के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने एसडीएम पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मंदिर न्यास के अध्यक्ष की छवि खराब करने का आरोप लगाया है।
धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन का आरोप और पुलिस शिकायत…
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब मंदिर के एक पुजारी अभिषेक शर्मा ने पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, जब माता की आरती के लिए भोग तैयार किया जा रहा था, उसी दौरान एसडीएम धर्मपाल चौधरी मंदिर की रसोई में दाखिल हुए। पुजारी का दावा था कि माता की रसोई में एसडीएम के प्रवेश करने और बर्तन उठाने से माता का प्रसाद अशुद्ध हो गया।
निरीक्षण के लिए पहुंचे थे एसडीएम, आरोपों को बताया बेबुनियाद….
दूसरी ओर, एसडीएम धर्मपाल चौधरी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धार्मिक परंपरा को तोड़ने नहीं, बल्कि प्रशासनिक निरीक्षण के उद्देश्य से मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जिस समय वे निरीक्षण के लिए गए थे, उस वक्त मंदिर में कोई अनुष्ठान नहीं चल रहा था और न ही वहां कोई मुख्य पुजारी मौजूद थे।
मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने दी सफाई, खोला सच….
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने एक वीडियो बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि बीते 17 अगस्त 2026 से मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में निरंतर सेवा दे रहे और रोजाना पांचों आरतियां कराते हैं। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर 2026 को पंडित अभिषेक शर्मा द्वारा एसडीएम पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और गलत हैं। घटना के समय वे स्वयं वहां मौजूद थे और पूरी स्थिति सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में भी दर्ज है।
मुख्य पुजारी के अनुसार, एसडीएम ने रसोइयों को बालों में टोपी लगाने का निर्देश दिया था। पंडित अभिषेक शर्मा की मंदिर में कोई ड्यूटी नहीं थी, इसलिए एसडीएम ने उन्हें रोका था। उन्होंने कहा कि एसडीएम ने किसी भी प्रकार की धार्मिक परंपरा नहीं तोड़ी है। अभिषेक शर्मा केवल मंदिर न्यास और प्रशासनिक अधिकारी का नाम बदनाम करने के उद्देश्य से यह झूठे आरोप लगा रहा है।
मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने खुलासा किया कि अभिषेक शर्मा ने उनके सामने एसडीएम धर्मपाल चौधरी के खिलाफ जातिसूचक और अपशब्द शब्दों का प्रयोग किया, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ा कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
दलित नेताओं में फैला आक्रोश…
इस मामले में हिमाचल प्रदेश के दलित नेता और गदर फ्रंट के प्रमुख रवि कुमार दलित ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सही बात का पक्ष लेने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों की सराहना की और पुलिस प्रशासन से तुरंत एक्शन लेने की मांग की।
रवि कुमार ने बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया कि प्रशासनिक अधिकारी पर की गई जातिसूचक टिप्पणी के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एट्रोसिटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने मुख्य पुजारी का बयान दर्ज कर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।
डीएसपी विजय कुमार भी हुए जातिवाद शोषण का शिकार…
हिमाचल प्रदेश के डीएसपी विजय कुमार ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए है। अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आने वाले डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) विजय कुमार का मामला हाल ही में काफी चर्चा में रहा है।
आरोप: डीएसपी विजय कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि लगभग 10 महीनों से कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा उनका संस्थागत उत्पीड़न किया जा रहा है और उनके साथ जातिगत आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार हो रहा है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) की कार्रवाई:
विजय कुमार की इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने जांच के आदेश दिए। आयोग ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली में पेश होने के लिए समन भी जारी किया है।
विरोध प्रदर्शन:
इस घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों, जैसे ‘दलित शोषण मुक्ति मंच’ ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
आप समझ सकते हैं हिमाचल प्रदेश के दूर दराज इलाकों में जहां गरीब बेबस दलित लोग बसे हैं, वह अपनी शिकायतों को लेकर ना तो पुलिस स्टेशन तक जा सकते हैं और न ही उच्च अधिकारियों को अवगत करवा सकते हैं सैकड़ो लोग जाति सूचक गलियां हर रोज खाते हैं और अपने जीवन को किसी तरह बचाकर जीवन जी रहे हैं।

