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बैन और अपील का नहीं हुआ असर…10 बजे के बाद भी बजते रहे पटाखे…पढ़ें भविष्य की झलक

बैन और अपील का नहीं हुआ असर…10 बजे के बाद भी बजते रहे पटाखे…पढ़ें भविष्य की झलक

देश की सुप्रीम कोर्ट और NGT को नहीं मिला राजनीतिक सहयोग…

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Ashoka Times….1 November 2024

AQUA

सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के दिशा निर्देशों को देश में राजनीतिक सहयोग नहीं मिल पाया जिसका नतीजा यह रहा कि दिवाली के अवसर पर जमकर रात के 12:00 बजे तक पटाखे चलते रहे।

बता दें कि जिला दण्ड़ाधिकारी सिरमौर सुमित खिमटा ने माननीय उच्चतम न्यायालय, भारत द्वारा जारी निर्देशों व ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियन्त्रण) नियम, 2000 की अनुपालना में दिवाली उत्सव के दौरान जिला सिरमौर के संवेदनशील एवंम साईलैंस जोन क्षेत्रों में ध्वनि एवंम् वायु प्रदूषण के नियन्त्रण के दृष्टिगत ध्वनियुक्त पटाखों के चलाने व अत्याधिक धुंआ सृजित करने वाली आतिशबाजी को चलाने पर प्रतिबन्ध लगाये जाने के आदेश जारी किए थे। आदेशों के अनुसार इन आदेशों की अनुपालना न करने वालों के विरुद्ध ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियन्त्रण) नियम, 2000 के अन्तर्गत कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जानी थी। लेकिन उनके दिशा निर्देशों का असर देखने को नहीं मिला साइलेंस जोन में भी पटाखे चलते रहे इतना ही नहीं लाइसेंस धारी जगह पर बिक रहे पटाखे में ग्रीन क्रैकर्स बहुत कम देखने को मिले अधिकतर पटाखे पॉल्यूशन को बढ़ाने वाले दिखाई दिए।

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बेहतर होता की प्रशासन यह सुनिश्चित करता की सभी लाइसेंस धारियों को केवल ग्रीन क्रैकर्स बेचने के सख्त निर्देश दिए जाते, जिससे पॉल्यूशन को काफी काम किया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ 50% से अधिक पटाखे हवा को प्रदूषित करने वाले थे।

हिमाचल पर कैसे पड़ता है प्रभाव….

उत्तर भारत में पूरी एनसीआर (NCR) में हालत बेहद खराब है aqi. 400 के करीब पहुंच गया है जहां सांस लेना बेहद मुश्किल है इसके कारण लगभग 7 करोड़ लोग दूषित हवा में जीने को मजबूर है। वही इस दूषित हवा से बचने के लिए लोग हिमाचल प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं प्रदेश में जितनी ज्यादा गाड़ियों की आवा जाही होगी प्रदूषण उतना ही अधिक होगा। हालांकि हिमाचल प्रदेश का बड़ा रिवैन्यू पर्यटन के नाम पर जेनरेट होता है।

कुल मिलाकर उत्तर भारत में बिगड़ी आबो हवा को बचाने के लिए सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की ही नहीं साथ में राजनीतिक दलों को भी आम जनता तक पर्यावरण मैसेज पहुंचने के लिए काम करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर मुंह पर मास्क लगाकर लोग जिंदा तो रहेंगे लेकिन वही जो आक्सीजन खरीद पाएंगे।

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