Ashoka Times…24 October 2025

हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए बुरी खबर है। प्रदेश की दवा उद्योगों से 52 दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर फेल साबित हुई है। वही दो दवाएं नकली भी मिली हैं। लेकिन अखबारों से उद्योगों के नाम पूरी तरह से गायब हैं। क्योंकि अधिकतर कंपनियां अखबारों की बड़ी विज्ञापन दाता हैं।
बेहद शर्मनाक बात है कि दवाएं फेल हुई हैं । लेकिन आपको यह पता नहीं चलेगा कि किस कंपनी की कौन सी दवा फेल हुई है क्योंकि बड़े-बड़े मीडिया हाउसों से दवाओं के फेल होने की खबर तो है लेकिन राज्य दवा नियंत्रक प्रधिकरण और फार्मा कंपनियों के दबाव में नेशनल पेपर और दूसरे मीडिया ने उद्योगों के नाम छापने से परहेज किया है। दरअसल यह पाठकों के साथ सीधा-सीधा विश्वास घात है ऐसे उद्योग जिनकी दवाएं फेल हुई है और हिमाचल में दो दवाएं नकली भी पाई गई है उन उद्योगों के नाम किसी भी मीडिया हाउस ने नहीं छापे हैं। जिसका सीधा-सीधा श्रेय राज्य दवा नियंत्रक अधिकारियों और उद्योगों के मालिकों को जाता है। आपको बता दे कि हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योग द्वारा अग्रणी और बड़े मीडिया हाउसिज़ को हर वर्ष करोड़ों रुपए के विज्ञापन दिए जाते हैं अगर किसी कंपनी की दवा नकली या फेल हो जाती है तो बस मीडिया हाउस को करना ये है की औद्योगों के नाम गुप्त रखने हैं।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि राज्य दवा नियंत्रक अपनी वेबसाइट पर सभी उद्योगों और फेल दवाओं के नाम डालती है आपको बता दें कि उस वेबसाइट तक पहुंचाने के लिए आम आदमी को कईं घने कोहरों के रास्ते से गुजरना पड़ता है और आम आदमी के पास इतना समय भी नहीं है कि वह वेबसाइट पर जाकर जिन फार्मा उद्योगों की दवाएं फेल हुई है और नकली पाई गई उनके नाम देखें और जिन बड़े मीडिया हाउस से उम्मीद की जाती है उन्होंने अपने विज्ञापन के चक्कर में उन सभी उद्योग के नाम अखबारों से गायब कर दिए हैं। हालांकि कुछ महीने पहले तक सभी अखबार उद्योगों की फेल दवाओं के साथ उनकी कंपनियों के नाम लिखते थे। लेकिन पिछले कुछ संस्करण से नकली दवाई और सैंपल फेल उद्योगों के नाम गायब हैं।
औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में हिमाचल के दवा उद्योगों में निर्मित 52 दवाएं गुणवता के पैमाने पर गुणवत्ता में फेल हो गई है। जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए है, उनमें बच्चों की जिंक सिरप से लेकर ब्लड प्रेशर, हृदय, संक्रमण, कैंसर, गैस्ट्रिक और दर्द निवारक जैसी आम और गंभीर बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का निर्माण बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, सोलन कालाअंब, पांवटा साहिब, ऊना व संसारपुर में हुआ हैं। इसके अलावा हिमाचल में निर्मित दो दवाए नकली भी निकली हैं। राज्य दवा नियंत्रक प्रधिकरण के द्वारा हर बार की तरह इस बार भी संबंधित दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर रहा है। लेकिन जिन लोगों ने विश्वास कर उपरोक्त दावों का सेवन किया है उन लोगों के साथ और उनके स्वास्थ्य के साथ जो खिलवाड़ हो चुका है उसकी भरपाई का कोई विकल्प फिलहाल देश की नीति में नहीं है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी सितंबर माह के ड्रग अलर्ट में राज्य में बनी 52 दवाएं गुणवत्ता जांच में सबस्टैंडर्ड पाई गई हैं। यह देशभर की असफल घोषित 112 दवाओं का लगभग 46 प्रतिशत है।
तो कुल मिलाकर धीरे-धीरे बड़े-बड़े मीडिया हाउस अपने विज्ञापनों को बचाने के लिए उन उद्योगों के नाम अपने अखबारों से गायब कर रहे हैं जो उन्हें करोड़ों रुपए का विज्ञापन हर वर्ष देते हैं और जिसके बलबूते पर हिमाचल प्रदेश में बड़े-बड़े मीडिया हाउस चल रहे हैं।
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