Ashoka time’s…7 December 25
नाहन–टोंडा–कुफ्टू रूट की वह ऐतिहासिक बस सेवा, जिसे हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉ. यशवंत सिंह परमार ने अपने पैतृक क्षेत्र बागथन को जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया था, अब पूरी तरह ठप हो चुकी है।
पहले हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने इस रूट को घाटे का हवाला देकर बंद किया और अब निजी बस संचालक ने भी पांच महीने के संचालन के बाद बस सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। करीब पांच दशक पुराने इस रूट ने न केवल दूरदराज के क्षेत्रों को नाहन शहर से जोड़ा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की आवाजाही में भी लोगों को बड़ी राहत दी थी। सरकारी बस के बंद होने पर स्थानीय लोगों में पहले ही रोष था, और अब निजी बस का बंद होना लोगों की समस्याओं को कई गुना बढ़ा रहा है। शनिवार को निजी बस संचालक ने रूट बंद करने की आधिकारिक पुष्टि की। संचालक के अनुसार, पिछले पांच महीनों से लगातार रूट घाटे में चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीच-बीच में निजी गाड़ियों द्वारा अनियमित ढंग से यात्रियों को ढोया जा रहा था, जिससे उनकी सवारी लगातार कम होती चली गई। उन्होंने बताया कि इसकी लिखित जानकारी आरटीओ नाहन को भी दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। साथ ही कुछ स्थानों पर सड़क की स्थिति भी काफी खराब बताई गई, जो संचालन में बाधा बन रही थी। इस बस सेवा के बंद होने का सबसे अधिक असर छात्रों पर पड़ा है। क्षेत्र की लगभग तीन दर्जन पंचायतों के विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। कई स्थानों पर 20 किलोमीटर तक कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे परीक्षा के दिनों में बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति प्रभावित हो रही है।


