सरकारों का करती है काम…दुर्घटना उपरांत नहीं मदद का इंतजाम

Ashoka Times…24 फरवरी 2026

पांवटा साहिब के अर्बन क्षेत्र की आशा उस वक्त घायल हो गई जब वह बच्चों को एलबेंडाजोले खिला कर आंगनबाड़ी से निकल रही थी। फिलहाल आशा वर्कर को नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया है।
पांवटा साहिब के वार्ड नंबर 5 में आशा वर्कर नेहा उस वक्त हादसे का शिकार हो गई जब आंगनबाड़ी से बच्चों को अल्बेंडाजोल खिलाकर वह बाहर निकल रही थी । दरअसल वार्ड नंबर 5 की सड़क की हालत पिछले कई दशकों से बेहद खराब है बड़े-बड़े पत्थर, गड्ढे इस सड़क में बने हुए हैं। उनका पांव जैसे ही एक गड्ढे पर पड़ा अचानक बैलेंस बिगड़ा और उनके पांव की दोनों हड्डियां चकनाचूर हो गई। अचेत अवस्था में उन्हें आसपास के लोग सिविल अस्पताल पांवटा साहिब लेकर आए जहां पर एक्स-रे में सामने आया कि उनके पैर की दोनों हड्डियां टूट गई है और स्थिति ऐसी है कि तुरंत ऑपरेशन करना होगा।

प्राइवेट अस्पताल में 50 हजार से एक लाख का खर्चा…
वहीं इस बारे में उनके पति अरविंद कुमार ने बताया बुधवार को वार्ड नंबर 5 वाल्मीकि बस्ती में आंगनवाड़ी में बच्चों को एल्बेंडाजोल की टैबलेट खिलाकर जिस वक्त उनकी पत्नी नेहा बाहर निकल रही थी उस वक्त उनका पांव अचानक गड्ढे में पड़ गया जिसके कारण उनका बैलेंस खराब हुआ और पांव की हड्डी दो जगह से फ्रैक्चर हो गई पांवटा साहिब के प्राइवेट अस्पताल में 50 हजार से एक लाख का खर्चा बताया गया है।
सरकार के लिए करती है काम…
स्वास्थ्य के क्षेत्र में जमीन स्तर पर आशा वर्कर कितने महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है यह बात किसी से छुपी नहीं है। लेकिन किसी हादसे या दुर्घटना के बाद उनके लिए कोई भी फौरी राहत, कोई नीति या कोई भी दुर्घटना बीमा योजना नहीं बनाई गई है। हिमाचल प्रदेश में पहले भी कई आशा वर्कर हादसे और दुर्घटनाओं की शिकार हो चुकी है।केंद्र और स्टेट सरकारों के लिए 24 घंटे स्वास्थ्य क्षेत्र में नए-नए सुधार जमीन स्तर पर पहुंचने के लिए कार्यरत आशाओं की यही सच्चाई है ।
वही इस बारे में एसडीएम गुंजीत चीमा ने कहा कि आशा वर्कर्स के साथ हादसा होने पर फौरी राहत का क्या प्रावधान है ये देखकर जो संभव मदद होगी वह मदद की जाएगी।







