Home / Himachal Pradesh / ऐसे थे यशवंत सिंह परमार…जयंती विशेष…अपने ही बेटे के प्रस्ताव को किया था नामंजूर…आज के राजनीतिज्ञों के लिए…

ऐसे थे यशवंत सिंह परमार…जयंती विशेष…अपने ही बेटे के प्रस्ताव को किया था नामंजूर…आज के राजनीतिज्ञों के लिए…

ऐसे थे यशवंत सिंह परमार…जयंती विशेष…अपने ही बेटे के प्रस्ताव को किया था नामंजूर…आज के राजनीतिज्ञों के लिए…

Ashoka Times…4 august 2025

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हिमाचल प्रदेश के निर्माता एवं पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने अपने प्रदेश के लिए जी जान से मेहनत की और कोई आकांक्षा नहीं रखी। मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास बड़े बेटे को खनन लीज देने का प्रस्ताव आया था। डा. परमार ने बिना कुछ विचार किए उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था।

डा. परमार की आज चार अगस्त को जयंती है। उनके कई किस्सों को सांझा करते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव वीसी फारका ने उनका कहना था कि पहाड़ी राज्य हिमाचल की विकास गाथा गढ़ने के लिए डा. परमार कृषि-बागबानी, गांव-गांव तक सड़क पहुंचाना, पर्यटन और जल विद्युत से प्रदेश के लोगों को आत्मनिर्भर करना चाहते थे। यूं तो हमने उस राह को छोड़ा नहीं है, लेकिन बिना किसी दूरदृष्टि के उसका अनुसरण भी नहीं किया है। यही वजह है कि देश के पहाड़ी राज्यों के लिए आदर्श रहा हिमाचल आज कई क्षेत्रों में पिछड़कर रह गया है।

हिमाचल प्रदेश के सबसे पहले मुख्यमंत्री पूरे हिमाचल को अपना घर मानते थे विकास की बयान उन्होंने कभी अपने घर से शुरू नहीं की बल्कि हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में एक नजर से सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा सभी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया। आज के राजनीतिज्ञों को मुख्यमंत्री रहे यशवंत परमार से एक सीख जरूर लेनी चाहिए भले ही उनके बीच कितने मतभेद हों लेकिन हिमाचल प्रदेश के विकास और यहां की भोली और प्रकृति की मार झेलने वाली जनता के लिए एक मत होकर काम करना चाहिए।

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