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स्टांप वेंडर्स कमीशन का गोरखधंधा…एसडीएम पांवटा ने दिए जांच के आदेश

स्टांप वेंडर्स कमीशन का गोरखधंधा…एसडीएम पांवटा ने दिए जांच के आदेश

पढ़िए कैसे सरकार को लगाया जा रहा हर रोज़ लाखों रुपए का चुना…

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Ashoka Times…

पांवटा साहिब में स्टैंप वेंडर्स के गोरखधंधे से सरकार भी नहीं बच पाई है जिसके कारण हररोज़ लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। 

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पांवटा साहिब में कुछ स्टैंप वेंडर्स मिलकर केवल रजिस्ट्रीओ के लिए पंजीकरण करवा कर लाखों की सरकारी कमीशन पर हाथ साफ कर रहे हैं । जबकि आम आदमी को 10-20 रूपय के स्टांप पेपर भी नहीं मिल पा रहे हैं। स्टैंप विक्रेता मोटी कमीशन के लिए काम कर रहे हैं और सरकार को सीधे-सीधे चुना भी लगा रहे हैं। दरअसल रजिस्ट्री करवाने के लिए 20,000 रूपये से अधिक के स्टांप पेपर स्टांप वेंडर्स नहीं बेच सकते लेकिन दर्जनभर के करीब स्टैंप वेंडर्स मिलकर 20-20 हजार के स्टैंप पेपर इक्कट्ठा कर रजिस्ट्री के लिए बेच देते हैं जिसके कारण सरकार को हर रोज लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नहीं मिल रहे दस बीस रूपए वाले स्टांप पेपर… आम जनता झेल रही परेशानी… 

पढ़िए कैसे…

नियम अनुसार कोई भी स्टांप वैंडर एक रजिस्ट्री पर केवल 20 हजार रुपए तक की स्टांप ड्यूटी ही बेच सकता है । 20 हजार से अधिक की स्टांप ड्यूटी के लिए ट्रेजरी ऑफिस या कुछ बैंक ही अधिकृत रहते हैं यहीं से कथित स्टैंप वेंडर्स का गोरखधंधा शुरू होता है दर्जनभर स्टैंप वेंडर मिल कर 20-20 हजार रुपए के स्टांप पेपर इकट्ठा कर यानी तकरीबन 2 लाख 40 हजार तक स्टांप पेपर रजिस्ट्री के लिए बेच देते हैं यानि 2 लाख से अधिक स्टांप पेपर मिल कर बेच देते हैं और 4% कमीशन जो सरकार को जानी थी वह वैंडर को चली जाती है।

क्योंकि ₹20 हजार से अधिक के स्टांप ड्यूटी पेपर खरीदने के लिए ट्रेजरी ऑफिस या कुछ बैंक ही अधिकृत होते हैं 20 हजार रुपए स्टांप पेपर की 4% कमीशन सीधे सरकार को जाती है। लेकिन दर्जनभर वेंडर्स 20-20 हजार रुपए के स्टांप पेपर रजिस्ट्री के लिए इकट्ठा कर बेच देते हैं और 4% कमीशन सीधे अपने खाते में जमा कर लेते हैं।

बता दें कि पांवटा साहिब में हर रोज करोड़ों रुपए की रजिस्ट्री होती है ऐसे में स्टैंप वेंडर्स हर रोज लाखों रुपए का नुकसान प्रदेश सरकार को पहुंचा रहे हैं।

यही कारण है कि अधिकतर स्टैंप वेंडर्स केवल रजिस्ट्री के लिए और मोटी 4% कमीशन के लिए काम कर रहे हैं जब आम आदमी को 5-10-20 रूपये के स्टैंप पेपर की जरूरत पड़ती है तो वह उन्हें नहीं मिल पाते और 10 ₹20 की जगह उन्हें 100-500 खर्च करने पड़ते हैं।

वही पांवटा साहिब के ट्रेजरी ऑफिसर ने बताया कि स्टांप वेंडर एक दिन में 20 हजार रुपए से अधिक स्टांप पेपर एक रजिस्ट्री के लिए नहीं दे सकता लेकिन यहां कुछ स्टांप वेंडर्स मिलकर इस गोरखधंधे को चला रहे हैं जिसके कारण सीधे तौर पर सरकार को नुकसान पहुंच रहा है । एक जानकारी के मुताबिक पिछले 4 वर्षों से ऐसा हो रहा है जब सरकार की जेब में लाखों रुपए का रेवेन्यू ना जाकर वेंडर्स की जेब में जा रहा है।

एसडीएम पांवटा ने दिए जांच के आदेश….

पांवटा साहिब में चल रहे स्टांप वेंडर्स के इस गोरखधंधे को लेकर एसडीएम पांवटा ने जांच के आदेश दिए हैं उन्होंने कहा कि तहसीलदार को लिखा जाएगा कि वह एक से अधिक वेंडर्स से खरीदे गए स्टांप पेपर की रजिस्ट्री को ना करें ताकि सरकार को उसके हिस्से का रेवेन्यू सीधे तौर पर मिल पाए।

उन्होंने ट्रेजरी ऑफिसर को भी निर्देश दिए कि सभी वेंडर्स के रजिस्टर चेक किए जाएं पता लगाया जाए कि ऐसे कितने वेंडर्स है जो छोटे स्टैंप पेपर न खरीद कर सीधे हजार, 20 हजार जैसे बड़े स्टांप पेपर खरीद रहे हैं और रजिस्ट्री में इस्तेमाल कर सरकार को चूना लगा रहे हैं।

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