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शर्मनाक…आपातकाल में ECG तक नहीं कर पाए डॉक्टर और नर्स…

शर्मनाक…आपातकाल में ECG तक नहीं कर पाए डॉक्टर और नर्स…

पढ़िए किस समाजसेवी को नहीं मिला इलाज…Dr पर पहले भी हैं ये आरोप…

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Ashoka Times…17 APRIL 23 

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वैसे तो पांवटा सिविल अस्पताल सुर्खियों में बना रहता है लेकिन इस बार की सुर्खियां कुछ अलग ही मुकाम पर डाक्टर और स्टाफ ने पहुंचाई है। 

पांवटा साहिब के एक बड़े समाजिक सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभाने वाले हेमंत शर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ गई उनकी हार्ट बीट काफी बढ़ गई थी परिवार के लोग सिविल अस्पताल ले कर आए तो ईसीजी (ECG) करने में ही 30 मिनट लगा दिए गए लेकिन ईसीजी नहीं हो पाई ईसीजी चलाने वाला कोई नहीं मिला जिसके बाद अस्पताल के बाहर प्राइवेट लैब के इंचार्ज को रात 11 बजे बुलवा कर ईसीजी करवाई गई और मरीज को वापस अस्पताल लाकर ईसीजी चेक करवाई गई । सिर्फ ईसीजी करवाने में ही तकरीबन 1 घंटा लग गया इसके बाद फिर सिविल अस्पताल पहुंचे वहां पर मौजूद डॉक्टर ने तुरंत आनन-फानन में बढ़ी हुई हार्टबीट देखकर सीधा रेफर कर दिया।

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अब हेमन्त शर्मा ने अपने साथ हुई इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं और शिकायत भी की है 

शिकायतकर्ता ने बताया कि हड्डी विशेषज्ञ डॉक्टर रात की ड्यूटी पर थे इस दौरान आधे घंटे तक ना तो डॉक्टर और ना ही नर्स ईसीजी करवा पाए आधे घंटे बाद प्राइवेट लैब से इसीजी करवा कर उन्हें दिखाया गया तो डॉक्टर साहब ने सीधे रेफर कर दिया।

उन्होंने बताया कि उसके बाद इलाज के लिए वह देहरादून गए बड़े ही अफसोस की बात है जब देहरादून में भी एक साधारण डॉक्टर द्वारा महज दो दवाई लिखकर और एक दवा खिलाकर ट्रीटमेंट कर दिया गया उन्होंने बताया कि अगर डॉक्टर चाहते तो बेहद आसानी से उनका पांवटा सिविल अस्पताल में ही ट्रीटमेंट हो सकता था लेकिन उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया पूरी रात उनका परिवार परेशान रहा है और पांवटा सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने अपनी नींद पूरी की है।

बता दें कि ये वही हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं जिन्होंने मरीजों से 60-60 हज़ार रुपए लेकर सिविल अस्पताल में ऑपरेशन कर दिए थे और संलिप्त सोलन के एक मेडिकल स्टोर के नकली बिल मरीजों को थमा दिए थे। मीडिया में खबरें आई तो इन्होंने अब उस धंदे को बंद कर दिया है। वही जांच के नाम पर ऐसे डॉक्टर पर कार्रवाई करने से पता नहीं क्यों अधिकारी और सरकारें डरती हैं।

बता दें कि पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में डॉक्टर बेहद छोटी-छोटी बीमारियों को लेकर भी हायर सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं जिस कारण आम आदमी को बेहद परेशानी झेलनी पड़ती है हमें लगता है कि अगर कोई मामला ऐसा सामने आता है जिसमें डॉक्टर द्वारा मामूली सी बीमारी को लेकर रख कर किया गया है तो डॉक्टर्स पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या बोले SMO…

वही SMO डॉक्टर अमिताभ जैन ने बताया कि अस्पताल में तीन ईसीजी मशीनें है जिसमें से एक काम कर रही है उन्होंने बताया कि अस्पताल में ईसीजी की जा रही है अगर ऐसा कोई मामला सामने आया है जिसमें ईसीजी नहीं की गई है तो मामले की जांच की जाएगी।

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