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राजा वीरभद्र का परिवार खिसक रहा भाजपा की ओर…?

राजा वीरभद्र का परिवार खिसक रहा भाजपा की ओर…?

भाजपा के राजनीतिक नारे पर सोशल मीडिया में बवाल…

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Ashoka Times…4 June 23

हिमाचल प्रदेश में राजा वीरभद्र कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभ रहे हैं आगे उनका परिवार भी कांग्रेस का मजबूत स्तंभ होने का दंभ भरता है लेकिन सोशल मीडिया पर विक्रमादित्य द्वारा डाली गई जय श्री राम की एक पंक्ति ने लोगों के जहन में सवाल खड़े कर दिए हैं।

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हिमाचल प्रदेश में आज भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लेकर कई बड़े राजनीतिक परिवारों में कसक है कई बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने से पहले कुछ धुआं सा उठा था जब हिमाचल प्रदेश का एक बड़ा परिवार भाजपा की ओर खिसकने लगा था।

क्या है आखिर पूरा मामला… दरअसल जय श्री राम नारा भाजपा का राजनीतिक नारा है और जो लोग राजनीति में भाजपा से प्यार करते हैं या भाजपा के मजबूत स्तंभ है वह इस नारे को अक्सर अपने साथ लेकर चलते हैं। दिग्गज नेता और छह बार हिमाचल के सीएम रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के बेटे और कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के सोशल मीडिया पेज पर निरंतर जय श्री राम का जिक्र किया जा रहा है. रविवार को कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हवाई जहाज में बैठे हुए एक फोटो अपने फेसबुक पेज पर डाली. साथ ही श्री राम को समर्पित दो पंक्तियां लिखीं. विक्रमादित्य सिंह ने पोस्ट में लिखा

 

‘त्याग दी सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए

राम ने खोया बहुत कुछ श्री राम बनने के लिए।।।

 

जय श्री राम ‘यूजर्स के कमेंट: सुबह करीब दस बजे ये पोस्ट की गई है. इसमें अब तक एक हजार के करीब कमेंट होने वाले हैं. उनकी पोस्ट पर समर्थकों ने अलग-अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कमेंट किए हैं. कुछ भाजपा समर्थकों ने भी कमेंट किया है कि वो राष्ट्र निर्माण में सच में भगवान राम के साथ और उनको सम्मान देने वालों के साथ आ जाएं. एक कमेंट ये भी दर्ज है जिसमें लिखा है-‘स्वागत, घुट-घुट कर नहीं जिया करते राजा साहब’. ये इशारा भाजपा में शामिल होने के लिए है. खैर, भाजपा समर्थक सोशल मीडिया यूजर्स की तरफ से ये सवाल तो कई बार उठता है कि विक्रमादित्य सिंह को भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार को कमजोर करने के लिए केंद्र कई कदम उठा रही है जिसमें सबसे बड़ा कदम है आर्थिक रूप से कमजोर करना, दरअसल हिमाचल प्रदेश सरकार की लोन लिमिट को 35% के करीब घटा दिया गया है जिसके कारण सीधे-सीधे हिमाचल सरकार ने केवल आर्थिक रूप से कमजोर होगी बल्कि इसका काफी बुरा असर देखने को मिल सकता है ऐसे में संभव है कि कई मंत्री विधायक मजबूरियों के चलते सरकार के खिलाफ काम करें क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर सरकार चलाना बेहद मुश्किल होगा। हिमाचल प्रदेश का विकास थम सकता है संभवत महाराष्ट्र की तरह यहां पर भी सरकार में उलट-पुलट हो सकता है। हालाकी हिमाचल प्रदेश इस तरह की घटिया राजनीति से काफी अछूता रहा है लेकिन आखिर कब तक…

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